रविवार, 22 जून 2014

इस्लाम स्वीकार  कर क्या मिला ?

             इराक के हालातो को देख कर एसा लग रहा है कि दुनिया पर एक नया प्रकार का संकट सामने खड़ा है . यहाँ प्रश्न शिया और सुन्नी का नहीं . प्रश्न इस बात का है की एक ही धर्म को मानने वाले अल्लाह की राह  पर चलने वालो  5  समय की नमाज   पड़कर दिन मे 5 बार रब को याद करने वाले उस खुदा से  क्या पैगाम पा रहे है . खुले  आम  जब खुद के मजहब के नुमाईन्दों को थोक के थोक गोलियों से भून रहे है वह भी अल्लाह के नाम पर .एसी परिस्थिति में धर्म को कथित राह  दिखाने वाले धर्म के बारे जरा - जरा सी बात पर फ़तवा उगलने वाले . आधुनिकीकरण का कथित विरोध कर इस्लाम के खतरे पर कोम को उकसाने वाले क्या इतने अपने सहधर्मियों की मोत पर चुप रह कर गुनाहगार नहीं है . विश्व की पूरी बिरादरी को सोचना चाहिए की इस्लाम के कबूलने के बाद भी उसकी फितरत एसी  है कि शिया रहेगा सुन्नी रहेगा या मुजाहिर .यही सुन्नी ताकत अब मजबूत होकर शियाओं को मुजहिरों को मिटाने  पर तुली है . पूरा इराक पहले निश्चित रूप से अन्य धर्म के अनुयाई थे मार काट मचा कर 1000 -१२०० साल पहले मजबूरी में इस्लाम कबूल किया . उनके पुरखों की गलतियों को आज उनके बच्चे भुगत रहे है . एसे  मजहब का आसरा क्यों  लेना यह विचार करना चाहिए  .यहाँ यह बात भी सत्य होती दिखती जो ऋग्वेद में कही गई की जो धर्म यह कहता हो कि उसके धर्म के आलावा अन्य कोई धर्म ठीक नही है तो यह पूरे जगत के लिए घातक सिद्ध होगा . आइये हम तो यह भी स्वीकार करते है की आप नमाज पढ़  कर भी हिन्दू हो सकते है .

सोमवार, 16 जून 2014

आज के विचार

                             राज नेतिक नेताओ की गिरफ़्तारी                               

        आज के समाचारों में पूर्व मंत्री श्री लक्ष्मी नारायण शर्मा की गिरफ़्तारी या समर्पण के समाचारों कइ साथ यह भी पढने में आया की कोर्ट के बाहर काफी संख्या में समर्थक थे . एक प्रश्न यह है कि कोर्ट की कार्यवाही के बाहर  समर्थको को ले जाने या आने के लिए प्रेरित करने के पीछे क्या उद्देश्य होते है . यह सब करके हम क्या दिखाना चाहते है?

१- क्या सरकार की कार्यवाही का विरोध के गए?

२- क्या उन पर लगाये गए आरोपों पर विरोध है ?

३- कोर्ट की कार्यवाही पर भरोसा नहीं?

४- उनके किये गए आरोपित कार्य के समर्थन का उद्देश्य है ?

     यह गंभीरता से सोचने का विषय है .

शनिवार, 14 जून 2014

नई दिशा के संकेत

आज प्रधान मंत्री ने आई एन एस विक्रमादित्य को देश को समर्पित करते हुए एक तरह से भविष्य की रक्षा नीति की और इशारा किया है. उन्होंने कहा है कि हम क्यों नहीं हथियार निर्यात नहीं कर सकते .यह भविष्य की नीति तो इंगित करता ही है , साथ ही यह भी इशारा है कि क्यों इस बारे में पिछले ६५ वर्षो से सोचा नहीं गया . यह तो स्पष्ट है कि पूर्व कथित शासन कर्ताओ ने बिना अपनी स्वार्थ पूर्ती के कोई भी कम नहीं किया . उनकी सोच सिर्फ इतनी रहती थी कि अमुक कार्य के करने से कितने वोट हमको प्राप्त हो सकते है और कितनी हानि  हो सकती है . देश का हित  अनहित का तो प्रश्न ही नहीं . यदि देश हथियार बनाने लगेगा तो  हथियारों की खरीद में मिलने वाली राशी कैसे प्रप्त होगी . बोफोर्स ,औगस्ता वेस्टलैंड जैसे कई उदहारण देखने को मिले .  

मंगलवार, 27 मई 2014

मोदी युग का प्रारम्भ

आजादी के बाद देश में एक नया वातावरण उत्साह एवं उल्लास का बना है | जनमत को यह अहसास हो रहा है कि शायद देश की दिशा और दशा में अनिवार्य रूप से परिवर्तन साफ़ दिख रहा है | जनाकांक्षा के अनुरूप नेतृत्व करता का यह अवश्यम्भावी कर्तव्य है कि वह केवल मूक दृष्टा न होकर रचनात्मक रूप से ऐसे कार्य को हाथ में ले जिससे यह परिवर्तन का संकेत स्पष्टरूप से कार्य रूप में दिखाई देना चाहिए तभी जन आकांक्षाओं की पूर्ति हो सकेगी |