आज प्रधान मंत्री ने आई एन एस विक्रमादित्य को देश को समर्पित करते हुए एक तरह से भविष्य की रक्षा नीति की और इशारा किया है. उन्होंने कहा है कि हम क्यों नहीं हथियार निर्यात नहीं कर सकते .यह भविष्य की नीति तो इंगित करता ही है , साथ ही यह भी इशारा है कि क्यों इस बारे में पिछले ६५ वर्षो से सोचा नहीं गया . यह तो स्पष्ट है कि पूर्व कथित शासन कर्ताओ ने बिना अपनी स्वार्थ पूर्ती के कोई भी कम नहीं किया . उनकी सोच सिर्फ इतनी रहती थी कि अमुक कार्य के करने से कितने वोट हमको प्राप्त हो सकते है और कितनी हानि हो सकती है . देश का हित अनहित का तो प्रश्न ही नहीं . यदि देश हथियार बनाने लगेगा तो हथियारों की खरीद में मिलने वाली राशी कैसे प्रप्त होगी . बोफोर्स ,औगस्ता वेस्टलैंड जैसे कई उदहारण देखने को मिले .
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