इस्लाम स्वीकार कर क्या मिला ?
इराक के हालातो को देख कर एसा लग रहा है कि दुनिया पर एक नया प्रकार का संकट सामने खड़ा है . यहाँ प्रश्न शिया और सुन्नी का नहीं . प्रश्न इस बात का है की एक ही धर्म को मानने वाले अल्लाह की राह पर चलने वालो 5 समय की नमाज पड़कर दिन मे 5 बार रब को याद करने वाले उस खुदा से क्या पैगाम पा रहे है . खुले आम जब खुद के मजहब के नुमाईन्दों को थोक के थोक गोलियों से भून रहे है वह भी अल्लाह के नाम पर .एसी परिस्थिति में धर्म को कथित राह दिखाने वाले धर्म के बारे जरा - जरा सी बात पर फ़तवा उगलने वाले . आधुनिकीकरण का कथित विरोध कर इस्लाम के खतरे पर कोम को उकसाने वाले क्या इतने अपने सहधर्मियों की मोत पर चुप रह कर गुनाहगार नहीं है . विश्व की पूरी बिरादरी को सोचना चाहिए की इस्लाम के कबूलने के बाद भी उसकी फितरत एसी है कि शिया रहेगा सुन्नी रहेगा या मुजाहिर .यही सुन्नी ताकत अब मजबूत होकर शियाओं को मुजहिरों को मिटाने पर तुली है . पूरा इराक पहले निश्चित रूप से अन्य धर्म के अनुयाई थे मार काट मचा कर 1000 -१२०० साल पहले मजबूरी में इस्लाम कबूल किया . उनके पुरखों की गलतियों को आज उनके बच्चे भुगत रहे है . एसे मजहब का आसरा क्यों लेना यह विचार करना चाहिए .यहाँ यह बात भी सत्य होती दिखती जो ऋग्वेद में कही गई की जो धर्म यह कहता हो कि उसके धर्म के आलावा अन्य कोई धर्म ठीक नही है तो यह पूरे जगत के लिए घातक सिद्ध होगा . आइये हम तो यह भी स्वीकार करते है की आप नमाज पढ़ कर भी हिन्दू हो सकते है .
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